महाभारत 1.70.33
स शाश्वतीः समा राजन्प्रजा धर्मेण पालयन्जरामार्छन्महाघोरां नाहुषो रूपनाशिनीम्
sa śāśvatīḥ samā rājanprajā dharmeṇa pālayanjarāmārchanmahāghorāṃ nāhuṣo rūpanāśinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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