महाभारत 1.70.38
यजतो दीर्घसत्रैर्मे शापाच्चोशनसो मुनेःकामार्थः परिहीणो मे तप्येऽहं तेन पुत्रकाः
yajato dīrghasatrairme śāpāccośanaso muneḥkāmārthaḥ parihīṇo me tapye'haṃ tena putrakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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