महाभारत 1.70.4
तेभ्यः प्राचेतसो जज्ञे दक्षो दक्षादिमाः प्रजाःसंभूताः पुरुषव्याघ्र स हि लोकपितामहः
tebhyaḥ prācetaso jajñe dakṣo dakṣādimāḥ prajāḥsaṃbhūtāḥ puruṣavyāghra sa hi lokapitāmahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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