महाभारत 1.70.8ददौ स दश धर्माय कश्यपाय त्रयोदशकालस्य नयने युक्ताः सप्तविंशतिमिन्दवेdadau sa daśa dharmāya kaśyapāya trayodaśakālasya nayane yuktāḥ saptaviṃśatimindaveइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें