महाभारत 1.71.58गुरोरुष्य सकाशे तु दश वर्षशतानि सःअनुज्ञातः कचो गन्तुमियेष त्रिदशालयम्guroruṣya sakāśe tu daśa varṣaśatāni saḥanujñātaḥ kaco gantumiyeṣa tridaśālayamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें