महाभारत 1.73.13हतेयमिति विज्ञाय शर्मिष्ठा पापनिश्चयाअनवेक्ष्य ययौ वेश्म क्रोधवेगपरायणाhateyamiti vijñāya śarmiṣṭhā pāpaniścayāanavekṣya yayau veśma krodhavegaparāyaṇāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें