महाभारत 1.73.31
एवं हि मे कथयति शर्मिष्ठा वार्षपर्वणीवचनं तीक्ष्णपरुषं क्रोधरक्तेक्षणा भृशम्
evaṃ hi me kathayati śarmiṣṭhā vārṣaparvaṇīvacanaṃ tīkṣṇaparuṣaṃ krodharaktekṣaṇā bhṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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