महाभारत 1.76.34
इयं चापि कुमारी ते शर्मिष्ठा वार्षपर्वणीसंपूज्या सततं राजन्मा चैनां शयने ह्वयेः
iyaṃ cāpi kumārī te śarmiṣṭhā vārṣaparvaṇīsaṃpūjyā satataṃ rājanmā caināṃ śayane hvayeḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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