महाभारत 1.76.5
ददृशे देवयानीं च शर्मिष्ठां ताश्च योषितःपिबन्तीर्ललमानाश्च दिव्याभरणभूषिताः
dadṛśe devayānīṃ ca śarmiṣṭhāṃ tāśca yoṣitaḥpibantīrlalamānāśca divyābharaṇabhūṣitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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