महाभारत 1.77.14
ययातिरुवाचवेद्मि त्वां शीलसंपन्नां दैत्यकन्यामनिन्दिताम्रूपे च ते न पश्यामि सूच्यग्रमपि निन्दितम्
yayātiruvācavedmi tvāṃ śīlasaṃpannāṃ daityakanyāmaninditāmrūpe ca te na paśyāmi sūcyagramapi ninditam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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