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महाभारत 1.8.13
ततः प्रादात्पिता कन्यां रुरवे तां प्रमद्वराम्विवाहं स्थापयित्वाग्रे नक्षत्रे भगदैवते
tataḥ prādātpitā kanyāṃ rurave tāṃ pramadvarāmvivāhaṃ sthāpayitvāgre nakṣatre bhagadaivate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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