महाभारत 1.80.27
पूरोस्तु पौरवो वंशो यत्र जातोऽसि पार्थिवइदं वर्षसहस्राय राज्यं कारयितुं वशी
pūrostu pauravo vaṃśo yatra jāto'si pārthivaidaṃ varṣasahasrāya rājyaṃ kārayituṃ vaśī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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