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महाभारत 1.83.4
ययातिरुवाचसुरर्षिगन्धर्वनरावमाना;त्क्षयं गता मे यदि शक्र लोकाःइच्छेयं वै सुरलोकाद्विहीनः; सतां मध्ये पतितुं देवराज
yayātiruvācasurarṣigandharvanarāvamānā;tkṣayaṃ gatā me yadi śakra lokāḥiccheyaṃ vai suralokādvihīnaḥ; satāṃ madhye patituṃ devarāja
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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