महाभारत 1.89.13
इलिनं तु सुतं तंसुर्जनयामास वीर्यवान्सोऽपि कृत्स्नामिमां भूमिं विजिग्ये जयतां वरः
ilinaṃ tu sutaṃ taṃsurjanayāmāsa vīryavānso'pi kṛtsnāmimāṃ bhūmiṃ vijigye jayatāṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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