महाभारत 1.89.26
ऐक्ष्वाकी जनयामास सुहोत्रात्पृथिवीपतेःअजमीढं सुमीढं च पुरुमीढं च भारत
aikṣvākī janayāmāsa suhotrātpṛthivīpateḥajamīḍhaṃ sumīḍhaṃ ca purumīḍhaṃ ca bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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