महाभारत 1.89.42
ततः संवरणात्सौरी सुषुवे तपती कुरुम्राजत्वे तं प्रजाः सर्वा धर्मज्ञ इति वव्रिरे
tataḥ saṃvaraṇātsaurī suṣuve tapatī kurumrājatve taṃ prajāḥ sarvā dharmajña iti vavrire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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