महाभारत 1.9.11
रुरुरुवाचआयुषोऽर्धं प्रयच्छामि कन्यायै खेचरोत्तमशृङ्गाररूपाभरणा उत्तिष्ठतु मम प्रिया
rururuvācaāyuṣo'rdhaṃ prayacchāmi kanyāyai khecarottamaśṛṅgārarūpābharaṇā uttiṣṭhatu mama priyā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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