महाभारत 1.90.34भरतः खलु काशेयीमुपयेमे सार्वसेनीं सुनन्दां नामतस्यामस्य जज्ञे भुमन्युःbharataḥ khalu kāśeyīmupayeme sārvasenīṃ sunandāṃ nāmatasyāmasya jajñe bhumanyuḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें