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महाभारत 1.90.75
तत्रैनं चितास्थं माद्री समन्वारुरोह
tatrainaṃ citāsthaṃ mādrī samanvāruroha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतत्रैनं चितास्थं माद्री समन्वारुरोह
tatrainaṃ citāsthaṃ mādrī samanvāruroha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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