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महाभारत 1.90.78
तत्रापि जतुगृहे दग्धुं समारब्धा न शकिता विदुरमन्त्रितेन
tatrāpi jatugṛhe dagdhuṃ samārabdhā na śakitā viduramantritena
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतत्रापि जतुगृहे दग्धुं समारब्धा न शकिता विदुरमन्त्रितेन
tatrāpi jatugṛhe dagdhuṃ samārabdhā na śakitā viduramantritena
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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