महाभारत 1.92.2तस्य रूपगुणोपेता गङ्गा श्रीरिव रूपिणीउत्तीर्य सलिलात्तस्माल्लोभनीयतमाकृतिःtasya rūpaguṇopetā gaṅgā śrīriva rūpiṇīuttīrya salilāttasmāllobhanīyatamākṛtiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें