महाभारत 1.92.39
दिव्यरूपा हि सा देवी गङ्गा त्रिपथगा नदीमानुषं विग्रहं श्रीमत्कृत्वा सा वरवर्णिनी
divyarūpā hi sā devī gaṅgā tripathagā nadīmānuṣaṃ vigrahaṃ śrīmatkṛtvā sā varavarṇinī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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