महाभारत 1.92.7
स्त्र्युवाचनाश्रेयस्यस्मि नागम्या न वक्तव्या च कर्हिचित्भज मां भजमानां त्वं राजन्कन्यां वरस्त्रियम्
stryuvācanāśreyasyasmi nāgamyā na vaktavyā ca karhicitbhaja māṃ bhajamānāṃ tvaṃ rājankanyāṃ varastriyam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें