महाभारत 1.93.18एषा गौरुत्तमा देवि वारुणेरसितेक्षणेऋषेस्तस्य वरारोहे यस्येदं वनमुत्तमम्eṣā gauruttamā devi vāruṇerasitekṣaṇeṛṣestasya varārohe yasyedaṃ vanamuttamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें