महाभारत 1.93.19
अस्याः क्षीरं पिबेन्मर्त्यः स्वादु यो वै सुमध्यमेदश वर्षसहस्राणि स जीवेत्स्थिरयौवनः
asyāḥ kṣīraṃ pibenmartyaḥ svādu yo vai sumadhyamedaśa varṣasahasrāṇi sa jīvetsthirayauvanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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