महाभारत 1.93.41
एवं तेषामहं सम्यक्शप्तानां राजसत्तममोक्षार्थं मानुषाल्लोकाद्यथावत्कृतवत्यहम्
evaṃ teṣāmahaṃ samyakśaptānāṃ rājasattamamokṣārthaṃ mānuṣāllokādyathāvatkṛtavatyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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