महाभारत 1.94.36
महेष्वासमिमं राजन्राजधर्मार्थकोविदम्मया दत्तं निजं पुत्रं वीरं वीर गृहान्नय
maheṣvāsamimaṃ rājanrājadharmārthakovidammayā dattaṃ nijaṃ putraṃ vīraṃ vīra gṛhānnaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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