महाभारत 1.94.3एवं स गुणसंपन्नो धर्मार्थकुशलो नृपःआसीद्भरतवंशस्य गोप्ता साधुजनस्य चevaṃ sa guṇasaṃpanno dharmārthakuśalo nṛpaḥāsīdbharatavaṃśasya goptā sādhujanasya caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें