महाभारत 1.94.74
कन्यापितृत्वात्किंचित्तु वक्ष्यामि भरतर्षभबलवत्सपत्नतामत्र दोषं पश्यामि केवलम्
kanyāpitṛtvātkiṃcittu vakṣyāmi bharatarṣabhabalavatsapatnatāmatra doṣaṃ paśyāmi kevalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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