महाभारत 1.95.4
अप्राप्तवति तस्मिंश्च यौवनं भरतर्षभस राजा शंतनुर्धीमान्कालधर्ममुपेयिवान्
aprāptavati tasmiṃśca yauvanaṃ bharatarṣabhasa rājā śaṃtanurdhīmānkāladharmamupeyivān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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