महाभारत 1.96.32
ततो भीष्मं शांतनवं शरैः शतसहस्रशःशाल्वराजो नरश्रेष्ठः समवाकिरदाशुगैः
tato bhīṣmaṃ śāṃtanavaṃ śaraiḥ śatasahasraśaḥśālvarājo naraśreṣṭhaḥ samavākiradāśugaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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