महाभारत 1.96.42
सोऽचिरेणैव कालेन अत्यक्रामन्नराधिपवनानि सरितश्चैव शैलांश्च विविधद्रुमान्
so'cireṇaiva kālena atyakrāmannarādhipavanāni saritaścaiva śailāṃśca vividhadrumān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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