महाभारत 1.96.54ते चापि बृहती श्यामे नीलकुञ्चितमूर्धजेरक्ततुङ्गनखोपेते पीनश्रोणिपयोधरेte cāpi bṛhatī śyāme nīlakuñcitamūrdhajeraktatuṅganakhopete pīnaśroṇipayodhareइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें