महाभारत 1.99.14
यो व्यस्य वेदांश्चतुरस्तपसा भगवानृषिःलोके व्यासत्वमापेदे कार्ष्ण्यात्कृष्णत्वमेव च
yo vyasya vedāṃścaturastapasā bhagavānṛṣiḥloke vyāsatvamāpede kārṣṇyātkṛṣṇatvameva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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