महाभारत 1.99.35
तयोरुत्पादयापत्यं समर्थो ह्यसि पुत्रकअनुरूपं कुलस्यास्य संतत्याः प्रसवस्य च
tayorutpādayāpatyaṃ samartho hyasi putrakaanurūpaṃ kulasyāsya saṃtatyāḥ prasavasya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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