महाभारत 1.99.7
अथ धर्मभृतां श्रेष्ठः परमर्षिः पराशरःआजगाम तरीं धीमांस्तरिष्यन्यमुनां नदीम्
atha dharmabhṛtāṃ śreṣṭhaḥ paramarṣiḥ parāśaraḥājagāma tarīṃ dhīmāṃstariṣyanyamunāṃ nadīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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