महाभारत 10.10.13
यं जित्वा तप्यते पश्चादापन्न इव दुर्मतिःकथं मन्येत विजयं ततो जिततरः परैः
yaṃ jitvā tapyate paścādāpanna iva durmatiḥkathaṃ manyeta vijayaṃ tato jitataraḥ paraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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