महाभारत 10.10.8
तं पतन्तमभिक्रम्य परिजग्राह सात्यकिःभीमसेनोऽर्जुनश्चैव माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ
taṃ patantamabhikramya parijagrāha sātyakiḥbhīmaseno'rjunaścaiva mādrīputrau ca pāṇḍavau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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