महाभारत 10.11.27स काञ्चनविचित्राङ्गमारुरोह महारथम्आदाय रुचिरं चित्रं समार्गणगुणं धनुःsa kāñcanavicitrāṅgamāruroha mahārathamādāya ruciraṃ citraṃ samārgaṇaguṇaṃ dhanuḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें