महाभारत 10.12.22अथ तद्दक्षिणेनापि ग्रहीतुमुपचक्रमेसर्वयत्नेन तेनापि गृह्णन्नेतदकल्पयत्atha taddakṣiṇenāpi grahītumupacakramesarvayatnena tenāpi gṛhṇannetadakalpayatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें