महाभारत 10.13.14
तं चैव क्रूरकर्माणं घृताक्तं कुशचीरिणम्रजसा ध्वस्तकेशान्तं ददर्श द्रौणिमन्तिके
taṃ caiva krūrakarmāṇaṃ ghṛtāktaṃ kuśacīriṇamrajasā dhvastakeśāntaṃ dadarśa drauṇimantike
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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