महाभारत 10.13.19
इत्युक्त्वा राजशार्दूल द्रोणपुत्रः प्रतापवान्सर्वलोकप्रमोहार्थं तदस्त्रं प्रमुमोच ह
ityuktvā rājaśārdūla droṇaputraḥ pratāpavānsarvalokapramohārthaṃ tadastraṃ pramumoca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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