महाभारत 10.13.20
ततस्तस्यामिषीकायां पावकः समजायतप्रधक्ष्यन्निव लोकांस्त्रीन्कालान्तकयमोपमः
tatastasyāmiṣīkāyāṃ pāvakaḥ samajāyatapradhakṣyanniva lokāṃstrīnkālāntakayamopamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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