महाभारत 10.16.28
नैव मे पतयः सन्ति न पुत्रा भ्रातरो न चनैव त्वमपि गोविन्द शममिच्छति राजनि
naiva me patayaḥ santi na putrā bhrātaro na canaiva tvamapi govinda śamamicchati rājani
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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