महाभारत 10.17.24
सोऽब्रवीज्जातसंरम्भस्तदा लोकगुरुर्गुरुम्प्रजाः सृष्टाः परेणेमाः किं करिष्याम्यनेन वै
so'bravījjātasaṃrambhastadā lokagururgurumprajāḥ sṛṣṭāḥ pareṇemāḥ kiṃ kariṣyāmyanena vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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