महाभारत 10.3.19
ब्राह्मणे दममव्यग्रं क्षत्रिये तेज उत्तमम्दाक्ष्यं वैश्ये च शूद्रे च सर्ववर्णानुकूलताम्
brāhmaṇe damamavyagraṃ kṣatriye teja uttamamdākṣyaṃ vaiśye ca śūdre ca sarvavarṇānukūlatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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