महाभारत 10.3.24
सोऽहमद्य यथाकामं क्षत्रधर्ममुपास्य तम्गन्तास्मि पदवीं राज्ञः पितुश्चापि महाद्युतेः
so'hamadya yathākāmaṃ kṣatradharmamupāsya tamgantāsmi padavīṃ rājñaḥ pituścāpi mahādyuteḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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