महाभारत 10.3.30
अद्याहं सर्वपाञ्चालान्निहत्य च निकृत्य चअर्दयिष्यामि संक्रुद्धो रणे पाण्डुसुतांस्तथा
adyāhaṃ sarvapāñcālānnihatya ca nikṛtya caardayiṣyāmi saṃkruddho raṇe pāṇḍusutāṃstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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