महाभारत 10.4.19सर्वोपायैः सहायास्ते प्रभाते वयमेव हिसत्यमेतन्महाबाहो प्रब्रवीमि तवानघsarvopāyaiḥ sahāyāste prabhāte vayameva hisatyametanmahābāho prabravīmi tavānaghaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें