महाभारत 10.5.4
अनेयस्त्ववमानी यो दुरात्मा पापपूरुषःदिष्टमुत्सृज्य कल्याणं करोति बहुपापकम्
aneyastvavamānī yo durātmā pāpapūruṣaḥdiṣṭamutsṛjya kalyāṇaṃ karoti bahupāpakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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